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मेरे मन कि गहराई में कहीं वे सब लोग विद्यमान हैं जिनसे मैं अपने जीवन में मिला। पर अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि वे लोग बड़ी हस्तियों में से न होकर साधारण ही थे। इनमें से एक महात्मा गाँधी थे जिनका मैं प्रशंसक हूँ।जब मैं छोटा था तब महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी बड़ा प्रशसंक था।पर जैसे जैसे मैं बड़ा हुआ। महात्मा गाँधी मेरे आदर्श बन गए मुझे यह समझ में आ गया कि बिना शक्ति का प्रयोग किए अपने सिद्धांतो के लिए लड़ने के लिए अदम्य साहस की आवश्यकता होती है,जो गाँधी जी में था।इन महान लोगों की गिनती में लाल बहादुर शास्त्री भी आते हैं।वे गाँधी जी के सच्चे अनुयायी थे।पर न जाने काँग्रेस उन्हें उतना सम्मान क्यों नहीं देती। तीसरा व्यक्ति जिसका मैं बहुत आदर करता हूँ वर्ल्ड बैडमिंटन चैपिंयन गोपीचंद हैं।वे एक सच्चे खिलाड़ी हैं।उन्होंने कोका कोला का ब्रैंड एम्बैसेडर बनने से इसलिए इन्कार कर दिया था कि कंपनी उन्हें यह नहीं बता पाई कि इसमें ऐसा क्या है जो बच्चों और खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद होगा।बहुत से खिलाड़ी विस्की,सिगरेट एयरेटेड ड्रिंक्स के ब्रैंड एम्वैसडर बन गए हैं जैसे कोका कोला थम्सअप आदि।मुझे समझ में नहीं आता कि आखिर सरकार इन लोगों के खिलाफ़ कोई निर्णय क्यों नहीं लेती।सरकार ने डाँक्टरों के खिलाफ़ मरीजों के हित में कानून बनाएं हैं अगर डॉक्टर अपना काम करने में कोताही बरतता है तो मरीज़ उसके खिलाफ़ मुकदमा दायर कर सकता है।फ़िर ब्रैंड मास्टर्स के खिलाफ़ ऐसा कदम क्यों नहीं उठाया जा सकता। न केवल उनके खिलाफ़ वरन् उन ब्रॅन्ड्स के और विज्ञापनों के खिलाफ भी कारवाई करनी चाहिए।

      मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि मुझे अच्छे शिक्षक मिले। हमारे समय शिक्षक विद्यार्थियों की प्रगति में अधिक रुचि रखते थे बजाय पैसे कमाने के। मैंने जब पुणे में स्कूल जाना शुरु किया तो अपने अंग्रेजी शिक्षक श्री.दीवान से ट्यूशन के लिए कहा- उन्होंने साफ़ इन्कार कर दिया।उस समय तो मुझे बुरा लगा पर बाद में मैं उनकी बड़ी इज्जत करने लगा। 8th class में वे मेरे फ्रेंच शिक्षक बन गए। उनका पढ़ाने का ढ़ग अनोखा था। वे हम से अंग्रेजी वाक्यों का फ्रेंच में अनुवाद करने को कहते थे फिर हमीं से उसे ठीक कराते।फिर हमीं से भूल सुधार करवाते तथा बताते कि गलतियाँ एकाग्रचित्त न रहने के कारण हुई हैं।कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए वे बिना किसी फ़िस के एक्स्ट्रा क्लास लेते थे ।

      दूसरे शिक्षक थे हमारे प्राध्यापक श्री वाच मेकर जिनको मैं हमेशा याद रखूँगा।एक बार किसी लड़के ने जो मुझसे अधिक शक्तिशाली था मुझे पीटा।शिकायत करने पर श्री वाच मेकर कहने लगे कि मैं उसे स्कुल से निकाल सकता हूँ पर कल जब तुम बड़े होगे और ऐसी परिस्थिति सामने आई तो क्या करोगे?इसलिए अपनी समस्याएँ अपने आप सुलझाना सीखो।उन्होंने मुझे LIC का मूल सिद्धांत सिखा दिया कि अपनी वस्तु से पहले व्यक्तित्व की मार्केटिंग करो।

      एक बार मैं अपने दोस्तों के साथ पिक्चर देखने जा रहा था वहाँ मेरे दोस्त की चाबी खो गईं। हम चाबी बनानेवाले के पास गए जो तीन आने लेकर भी चाबी न बना सके। फिर हमने एक ऐसा Key maker देखा जो मराठी की पुस्तक पढ़ रहा था।उसने कहा कि,मैं छह आने लूँगा,मेरे दोस्त ने जब कुछ बात करने की कोशिश की तो उसने कहा मेरी चार्जेस यही हैं बनवाना आपकी मर्ज़ी और वह फिर पढ़ने लगा।तब मेरे दोस्त ने कहा कि चाभी 3 मिनट में बना ना होगा।उसने ठीक तीन मिनट में चाभी बनाई और न एक पैसा ज्यादा लिया न कम।जब हमने पूछा कि ऐसे उसे काम कैसे मिलेगा?तो वह बोला कि मुझे काम इसलिए मिलता है किं a) मैं काम जानता हूँ b) मैं एक पैसा न ज्यादा लेता हूँ न कम।अनजाने में ही उसने हमें एक सफल व्यवसायी का गुर बता दिया।

      1974-75 में मैं काफ़ी समय बाद टैक्सी से बॉम्बे गया।थाना क्रिक ब्रिज से गुजरते हुए मुझे एक बुजुर्ग की याद आ गईं सफेद धोती,पगड़ी,भूरा कोट पैर में कोल्हापुरी चप्पल और पैर में कोल्हापुरी चप्पल और परेशानियों से थका माँदा चेहरा मँझले कद का लेबर मुकादम जिसने मुझे दूसरों के लिए कैसे जिया जाता है सिखा दिया। एक नज़र में ही वे सड़कों के गढ्ढे पहचान लेते। एक बार उन्होंने मुझसे पैसे बढवाने के लिए कहा पर बॉस ने साफ इन्कार कर दिया।वे अपने आदमियों के साथ काम छोड़ कर चले गए। पर तीन महीने बाद ही फिर आकर उन्होंने काम माँगा।मैंने उनसे कहा कि पैसा तो अभी भी नहीं बढ़ा है,पर वे बोले काम चाहिए पैसा नहीं और मैं अपने पेट की बात होती तो न आता पर इतने लोगों को भूखा नहीं देख सकता,क्या हमारे नेताओं में से कोई भी ऐसा है ?उनके इस व्यवहार से मैं न केवल प्रभावित हुआ वरन् शर्मिन्दा भी हुआ और बॉसे लड़कर उनके पैसे बढ़वा दिए।एक और व्यक्ति को जिसका वर्णन मेरे साथी ने मुझसे किया था,मैंने याद रखा है। वह आदमी बहुत अकेला और उदास था। एक दिन वह वेश्या के यहाँ गया।वह उस से बात करके यह अकेलापन बाँटना चाहता था।15 मिनट बात करने के बाद उसने वेश्या को पैसे देने चाहे पर उसने लेने से इन्कार कर दिया।वह बोली मैं शरीर बेचने के पैसे लेती हूँ, बात करने के नहीं। वह यह सुनकर हैरान रह गया। वह गरीब और ज़रुरतमंद औरत दूसरे के दुख को इतना समझती है कि उसने अपना नुकसान कर दिया। वह वाक़ई बहुत खूबसूरत थी।

      एक और व्यक्ति मुझे याद है एक बड़े कथकली नर्तक जो राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किए गए थे।मैं अपने मित्र के साथ कोचीन गया हुआ था,वहाँ उनके शो का विज्ञापन देखा कि श्री देवन का एक शो होगा। जहाँ कथकली की बारिकियाँ दर्शकों को समझाई जाएँगी।टिकट खरीदकर जब हम वहाँ पहुँचे तो सिर्फ एक वह पुरुष और उनकी पत्नी को छोड़कर वहाँ कोई नहीं था। उन्होंने कहाँ कि चाहे एक दर्शक हो तो भी वे शो करेंगे। उनका जीवन लक्ष्य कथकली का उन्नयन है पर:वे हर जगह शो करते समय कथकली की बारिकियाँ दर्शकों को समझाते हैं।समय होते ही उन्होंने हमें समझाना शुरु किया-मेकअप,दृष्टि भंगिमा,मुद्रा आदि का क्या महत्व है उनका प्रयोग कैसे किया जाता है आदि आदि। मेकअप से कैसे अनेक प्रकार की भावनाएँ व्यक्त की जाती हैं। वे स्वयं बिना किसी मेकअप के मंच पर आए और दृष्टि भंगिमा दिखाकर समझाया,कि कैसे नज़र से ही हम क्रोध,ईर्ष्या,प्रेम,दु:ख आदि व्यक्त कर सकते हैं। फिर नृत्य का प्रदर्शन हुआ।हम लोगों ने वास्तव में पूरा आनंद लिया क्योंकि हमें सब समझ में आने लगा था।आश्चर्य की बात है कि राष्ट्रिय पुरस्कर विजेता होते हुए भी उनमें कोई अहंकार नहीं था। बाद में श्री देवन और उनके दल के साथ हम लोगों ने एक फोटो भी खिंचवाई।

इस महापुरुष के समक्ष मैं नतमस्तक हूँ।

 


संकेत स्थ
के विकासक नोवेसिस टेक्नाँलाँजिज प्रा. लि. पुणे